रायपुर
छत्तीसगढ़ में विधानसभा चुनाव के दौरान कांग्रेस ने शराबबंदी को अपना मुद्दा बनाकर सत्ता तो हासिल कर लिया, लेकिन शराबबंदी पर सरकार की कथनी और करनी में बड़ा फर्क है. बता दें कि प्रदेश में सरकार के किए वादों से उलट यहां शराब की बिक्री और बढ़ गई है, जिससे सरकार को राजस्व में काफी इजाफा हो रहा है. वहीं इस मामले को लेकर अजीत जोगी ने निशाना साधते हुए कहा है कि भूपेश बघेल की कांग्रेस सरकार ने छत्तीसगढ़ को 'शराब की मंडी' बना दिया है.

दरअसल, मानसून सत्र के दौरान मरवाही विधायक अजीत जोगी ने आबकारी और उद्योग मंत्री कवासी लखमा से बीते 17 दिसंबर 2018 से लेकर मई 2019 तक प्रदेश में शराब की बिक्री और राजस्व की जानकारी मांगी थी. उन्होंने शराब की ब्रांड और कितनी ब्रांड पंजीकृत हैं, इसकी भी जानकारी मांगी थी. इसके जवाब में मंत्री कवासी लखमा ने कहा कि 17 दिसंबर 2018 से लेकर मई 2019 तक सरकार में शराब की बिक्री से 2245.46 करोड़ रुपए का राजस्व मिला है. वहीं विदेशी शराब से ज्यादा खपत देशी शराब की हुई है.

कवासी लखमा ने कहा कि प्रदेश में शराब के 526 ब्रांड पंजीकृत हैं और दिसंबर 2018 में सरकार ने शराब के नए ब्रांड के पंजीयन किए जाने का आदेश दिया था. वहीं दिसंबर 2018 में शराब की खपत 6,59,798 लीटर रही, जिसमें से 188.94 करोड़ की राशि सरकारी खजाने में राजस्व के तौर पर मिली है. वहीं मई 2019 में शराब की खपत 24,61,549 लीटर रही, जिससे सरकार को 425.39 करोड़ रुपए का राजस्व प्राप्त हुआ है.

वहीं अजीत जोगी ने पिछले 6 महीनों में शराब की खपत के साथ राजस्व में बढ़ोतरी और विभाग से मिले आंकड़ों को देखकर भूपेश बघेल ओर मंत्री कवासी लखमा को बधाई दी है.

अजीत जोगी ने कहा कि सरकार ने होने वाले राजस्व में बढ़ोतरी और शराब की ब्रांड बढ़ने, समय अवधि बढ़ाने के साथ-साथ कीमत बढ़ाई है. उन्होंने कहा कि कांग्रेस सरकार ने शराबबंदी का जो वादा किया था, वो तो पूरा किया नहीं, उल्टा छत्तीसगढ़ को शराब की 'मंडी बना दिया' है.

अजीत जोगी ने ये भी कहा कि शराबबंदी के मुद्दे को भूपेश सरकार टाल रही है. जोगी ने ऐसा अनुमान लगाया है कहा कि इन 5 वर्षों में प्रदेश में शराबबंदी नहीं होगी. वहीं इस मामले में नेता प्रतिपक्ष धरमलाल कौशिक ने भी सरकार पर निशाना साधा है. उन्होने कहा है कि 'जिस दिशा में सरकार शराबबंदी को लेकर जा रही है, उस दिशा में वे अपने वादों से मुकर रही है. इस बार सदन में शराबबंदी का मुद्दा बड़ा है, क्योंकि शराब की खपत में लगातार बढ़ोतरी रही है.

धरमलाल कौशिक ने कहा कि सरकार शराबबंदी करने के बजाए लोगों को शराब परोस रही है. उन्होंने कहा कि शराबबंदी को लेकर सरकार बिलकुल गंभीर नहीं है. कौशिक ने कहा कि शराब से आने वाले राजस्व से तनख्वाह बांटने की योजना सरकार बना है.