नई दिल्ली 
प्रदेश कांग्रेस में संगठन की जिम्मेदारी संभाल रहे दोनों प्रमुख नेता एक-दूसरे के खिलाफ न केवल हमलावर हो गए हैं, बल्कि एक-दूसरे को कमजोर साबित करने में जुटे हैं। एक तरफ प्रदेश प्रभारी पीसी चाको वर्किंग प्रेजिडेंट के अधिकार बढ़ा रहे हैं तो दूसरी तरफ शीला दीक्षित ने एक वर्किंग प्रेजिडेंट को पहले से ज्यादा अधिकार दे दिए हैं। इस बीच प्रदेश कांग्रेस के प्रवक्ता का कहना है कि शीला दीक्षित की अगुवाई में वरिष्ठ नेताओं ने राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी से मिलने का समय मांगा है। सूत्रों का कहना है जब तक राष्ट्रीय अध्यक्ष पर फैसला नहीं हो जाता है, तब तक प्रदेश में इसी तरह उठापटक होगी। इससे पार्टी और संगठन दोनों को भारी नुकसान हो रहा है। 
शीला-चाको के बीच चल रहा है पावर गेम
पिछले कई दिनों से शीला और पीसी चाको के बीच पावर गेम चल रहा है। शीला दीक्षित नए-नए फैसले ले रही हैं, जबकि पीसी चाको उनके फैसले को पलटने की कोशिश में लगे हुए हैं। इसी कड़ी में एक बार फिर चाको ने मंगलवार शाम शीला दीक्षित को लेटर लिखकर अपनी नाराजगी जाहिर की। यह भी कहा कि आपकी सेहत ठीक नहीं है। मैंने अभी तक जो भी लेटर लिखे हैं, उनका आपकी तरफ से जवाब नहीं मिला है। विधानसभा चुनाव आनेवाले हैं। पार्टी को मजबूत करने की जरूरत है, जो हो नहीं पा रहा है। इसलिए मैं तीनों वर्किंग प्रेजिडेंट को स्वतंत्र रूप से काम करने के लिए अधिकृत कर रहा हूं। 

गलत बयानबाजी दुर्भाग्यपूर्ण : चाको चाको ने आगे लिखा है कि तीनों वर्किंग प्रेजिडेंट अपने-अपने एमसीडी क्षेत्र के अनुसार, जिला और ब्लॉक अध्यक्षों की बैठक करेंगे। उनमें लिए निर्णयों से आपको अवगत कराएंगे। चाको ने तीनों वर्किंग प्रेजिडेंट हारून यूसुफ, देवेंद्र यादव और राजेश लिलोठिया को भी लेटर लिखकर इसकी जानकारी दी और उन्हें दिए अधिकारों के बारे में बताया। चाको ने प्रदेश कांग्रेस के कुछ तथाकथित प्रवक्ता द्वारा प्रभारी के खिलाफ दी गई गलत बयानबाजी को दुर्भाग्यपूर्ण बताया है। लिखा है कि प्रदेश अध्यक्ष की ही जिम्मेदारी बनती है कि वह ऐसे लोगों को अनुशासन में रखे। 

सोमवार को लिया फैसला, बुधवार को बताया इसके बाद प्रदेश कांग्रेस की तरफ से बुधवार को शीला द्वारा लिए गए फैसले की चिट्ठी जारी की गई। यह सोमवार को लिखी गई थी, लेकिन मीडिया में बुधवार को जारी की गई। एक तरह से शीला ने चाको के नहले पर दहला फेंका है। चाको ने वर्किंग प्रेजिडेंट को अधिकार दिए थे तो शीला ने उसमें से 2 के अधिकार कम कर दिए। जबकि एक को पहले से भी अधिक अधिकार दे दिए गए। शीला ने अपने नए आदेश में हारून युसूफ और देवेंद्र यादव को को डूसू चुनाव और एनएसयूआई तक सीमित कर दिया, जबकि लिलोठिया को नॉर्थ व ईस्ट एमसीडी, यूथ कांग्रेस और प्रदेश कांग्रेस के सभी प्रकोष्ठों की जिम्मेदारी सौंप दी गई है। इससे कांग्रेस में हलचल मच गई है। इसके बारे में देवेंद्र यादव का कहना था कि उन्हें अब तक पत्र नहीं मिला है। गुटबाजी कहना सही नहीं : लिलोठिया 
वर्किंग प्रेजिडेंट राजेश लिलोठिया का कहना है कि अभी जो पत्राचार हो रहा है, वह पार्टी का आतंरिक लोकतंत्र है। इसे गुटबाजी कहना सही नहीं होगा। उन्होंने यह भी माना कि पीसी चाको का पत्र उन्हें मिला है और यह उनके अधिकार क्षेत्र में आता है। उन्होंने कहा कि हम यह कह सकते हैं कि संगठन जिस स्थिति में हमें मिला था, उसे हम बेहतर करने में ही लगे हुए हैं। जहां तक नई जिम्मेदारी की बात है तो उनका कहना है कि हमें जो भी जिम्मेदारी दी गई है वह सोच समझ कर दी गई होगी। अन्य दोनों वर्किंग प्रेसिडेंट के बारे में उन्होंने कहा कि वो काफी अनुभवी नेता हैं, उन्होंने डूसू चुनाव की जिम्मेदारी दी गई है, जो काफी अहम है।