डिंडौरी
मध्यप्रदेश के आदिवासी बहुल डिंडौरी जिले में "स्कूल चलें हम" अभियान के तहत साइकिल वितरण योजना में शिक्षा विभाग के अफसरों की बड़ी लापरवाही उजागर हुई है. मामला जिले के मेंहदवानी विकासखंड मुख्यालय का है, जहां उत्कृष्ट विद्यालय के खेल परिसर एवं शौचालयों पर साइकिल बनाने वाले ठेकेदार के गुर्गों ने अपना कब्ज़ा जमा लिया है. इस वजह से छात्र- छात्राएं न खेल पा रहे हैं और न ही शौचालयों का उपयोग कर पा रहे हैं.

खेल के मैदान एवं शौचालयों में साइकिल पार्ट्स का भंडार लगा हुआ है, लिहाजा शौच के लिए छात्रों को बाहर जाना पड़ता है. एक महीने से स्कूल के खेल परिसर में खुले आसमान के नीचे सैकड़ों साइकिलें रखी हुई हैं. बारिश के कारण जहां साइकिलें खराब हो रही हैं, वहीं साइकिल बनाने वाले ठेकेदार के 6 कर्मचारियों को रहने के लिए स्कूल का एक कमरा उपलब्ध कराया गया है. लापरवाही उजागर होने के बाद अब जवाबहेर अधिकारी मामले से अंजान बनते हुए नजर आ रहे हैं. शिक्षा समिति के जिलाध्यक्ष गंगा पट्टा ने शिक्षा विभाग के अफसरों को आड़े हाथ लेते हुए बीजेपी और कांग्रेस के नेताओं पर जमकर निशाना साधा है.

स्कूल के प्राचार्य एच.एस. मसराम खुद स्वीकार कर रहे हैं कि स्कूल परिसर में साइकिल तैयार करने की वजह से छात्रों की पढ़ाई, खेल सहित अन्य गतिविधियां प्रभावित हो रही हैं लेकिन वरिष्ठ अफसरों के फरमान के आगे वो बेबस दिखाई दे रहे हैं. प्राचार्य ने बताया कि एक महीने से साइकिल खुले आसमान के नीचे रखी हुई हैं जो बारिश में खराब हो रही हैं और शिक्षण सत्र शुरू हुए करीब डेढ़ महीने गुजरने के बाद भी छात्रों को साइकिल वितरण नहीं हो पाया है जिसके कारण दूरदराज के छात्रों को पैदल ही स्कूल आना पड़ रहा है.

जिस उत्कृष्ट विद्यालय में साइकिल का भंडार लगा हुआ है उससे विकासखंड शिक्षाधिकारी कार्यालय की दूरी बमुश्किल दस मीटर होगी लेकिन साहब को नहीं पता कि स्कूल के शौचालय में साइकिल पार्ट्स रखे होने के कारण छात्रों को दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है.