सदर अस्पताल में बीती रात मानवता को शर्मसार कर देने वाली एक और घटना सामने आई। जिससे सदर अस्पताल में मरीजों के साथ हो रहे अमानवीय व्यवहार का पर्दाफाश हुआ। घटना एक दुष्कर्म पीड़िता नाबालिग बच्ची की मेडिकल जांच से जुड़ा है। बच्ची व उसकी मां शाम से लेकर सुबह तक अस्पताल का चक्कर लगाती रही। डाक्टरों के आगे मेडिकल जांच कर देने के लिए हाथ जोड़ते रही। परंतु डाक्टरों का दिल नहीं पसीजा। आखिरकार सोशल मीडिया में वायरल हो रही खबरों पर सिविल सर्जन के सर्जन के संज्ञान लेने के बात मामला पटरी आया और 16 घंटे बाद सदर अस्पताल में पीड़िता की मेडिकल जांच शुरू हुई। घटना बुधवार शाम की बतायी जाती है। पुलिस के मुताबिक पीड़िता को सदर अस्पताल में मेडिकल जांच के लिए बुधवार की शाम करीब सात बजे भेजा गया। परंतु पूरी रात व अगले दिन सुबह दस बजे तक उसकी मेडिकल जांच नहीं की जा सकी। इधर, सिविल सर्जन ने इस मामले में संबंधित डाक्टर व कर्मियों से शोकॉज किया है।

टालते रहे अस्पताल के डाक्टर 
पीड़िता की मां का आरोप है कि सदर अस्पताल की महिला डॉक्टर एक दूसरे पर मेडिकल जांच टालते रहीं। सदर अस्पताल द्वारा पीड़िता की जारी पर्ची में उसके भर्ती होने का समय बुधवार की शाम 6:58 बजे दर्शाया गया है। पीड़िता की मां के मुताबिक उस वक्त वहां पर मौजूद महिला डाक्टर ने कहा कि उनकी ड्यूटी रात 8 बजे समाप्त हो रही है। नाइट ड्यूटी वाली डाक्टर मेडिकल जांच करेगी। परंतु आश्चर्य की बात यह कि नाइट ड्यूटी वाली डाक्टर ने रात में मेडिकल जांच करने से इनकार कर दिया व कहा कि सुबह ही मेडिकल जांच हो सकेगी। डाक्टरों के टालमटोल की नीति सुबह दस बजे तक जारी रही। सिविल सर्जन के आदेश पर सुबह करीब 11 बजे पीड़िता की जांच की गयी।