जब आप अपने बच्चे डिनर के बाद टेबल साफ करने के लिए कहते हैं या गंदे कपड़े मशीन में डालने के लिए बोलते हैं तो वे कैसे रिस्पॉन्स करते हैं? अगर वे नखरे करते या मुंह बनाते हैं, क्योंकि काम करना बोरिंग लगता है तो आपको चीजें सुधारने की जरूरत है। ऐसा इसलिए क्योंकि जो बच्चे घर का काम करते हैं वे आगे चलकर सफल युवा बनते हैं।

हाउ टु रेज एन अडल्ट की ऑथर जूली ने अपनी रिसर्च से डेटा शेयर किया। उन्होंने बताया कि बच्चों को घर के काम करवाने से उन्हें लगता है कि काम जीवन का जरूरी हिस्सा है। जब पैरंट्स खुद काम करते रहते हैं तो बच्चों के मन में यह बात बैठ जाती है कि ठीक है अगर कोई दूसरा काम कर रहा है और वे यह चीज नहीं सीख पाते कि हर किसी को काम में अपना कॉन्ट्रिब्यूशन देना चाहिए।

जूली का मानना है कि जो बच्चे घर के काम करते हैं वे बड़े होकर बेहतर एंप्लॉयी बनते हैं। वे दूसरों के साथ बेहतर सामंजस्य बैठाकर काम करते और उनकी समस्याओं को भी समझते हैं। उन्हें कोई काम अकेले करने में भी डर नहीं लगता।

इसलिए पैरंटिंग के दौरान यह गलती करना ठीक नहीं है। जूली बताती हैं कि उन्होंने ऐसे पैरंट्स की लाइफ पर काफी फोकस किया है जो बच्चों के जीवन में ज्यादा इन्वॉल्व नहीं होते और यह ठीक भी है। वहीं जो पैरंट्स बच्चों की छोटी-छोटी चीजों में दखल देते हैं और ऐसा सोचते हैं कि जब तक हर कदम पर उनके पैरंट्स उन्हें बचाएंगे नहीं, साथ नहीं देंगे तो वे सफल नहीं हो पाएंगे, वे बड़ी गलती करते हैं।

हर मां-बाप के अंदर ये प्रवृत्ति होती है लेकिन बच्चों को इसकी जरूरत नहीं होती। उन्हें जीवन के उतार-चढ़ावों से खुद जूझना चाहिए। उन्हें सुरक्षा दें, अच्छे खाने की व्यवस्था करें। जीवन के जरूरी लेसन सिखाएं, यह आपकी पहली जिम्मेदारी है।