पटना
बिहार में अक्यूट इन्सेफलाइटिस सिंड्रोम (एईएस) की वजह से 154 बच्चों की मौत के बाद आखिरकार सीएम नीतीश कुमार ने सोमवार को इस पर चुप्पी तोड़ी। सोमवार को विधानसभा में चमकी बुखार पर के कहर पर जवाब देते हुए नीतीश ने कहा कि जो भी हुआ वह बहुत दुर्भाग्यपूर्ण है। उन्होंने साफ कहा कि इस पर सिर्फ दुख व्यक्त करना पर्याप्त नहीं है। यह काफी गंभीर मुद्दा है। सीएम ने कहा कि सरकार ने बचाव की पूरी कोशिश की है। इस पर विशेषज्ञों की एक टीम बनाई गई, जिससे इसकी तह तक जाया जा सके।

सोमवार को बिहार विधानसभा में चमकी बुखार से मौतों का आंकड़ा देते हुए बिहार के स्वास्थ्य मंत्री मंगल पांडेय ने कहा, 28 जून तक चमकी बुखार से पीड़ित करीब 720 बच्चे भर्ती हुए। इनमें से 586 स्वस्थ हो गए जबकि 154 की मौत हुई है।


उधर, चमकी बुखार पर अपनी चुप्पी तोड़ते हुए नीतीश ने सदन में साफ कहा कि उनकी सरकार लगातार इस दिशा में प्रयास करने में जुटी है। उन्होंने कहा कि हमने विशेषज्ञों की टीम बनाई है और हम यह पता लगाने की कोशिश में हैं कि आखिर यह बीमारी होती क्यों है। नीतीश ने कहा कि अभी तक इस बीमारी को लेकर विशेषज्ञों की राय अलग- अलग रही है।

'अमेरिका से भी ली गई जानकारी'
नीतीश ने आगे कहा, एईएस की रिपोर्ट अमेरिका भेजकर मामले की जानकारी ली गई। 2014 से ही इसके कारणों का पता लगाने के लिए रिसर्च जारी है। पर, अभी तक हम अंतिम नतीजे पर नहीं पहुंच पाए हैं। इस बीमारी पर लोगों की अलग-अलग राय है। कुछ लोगों का मानना है कि खाली पेट लीची खाने की वजह से बच्चों को यह बीमारी हुई।

'आखिर ज्यादातर पीड़ित गरीब परिवार से ही क्यों?'
सीएम ने कहा, मैंने अस्पताल में भर्ती मरीजों और उनके अभिभावकों से मुलाकात की। सबसे बात की और इस नतीजे पर पहुंचा कि ज्यादातर पीड़ित गरीब परिवारों से हैं और उनमें भी बच्चियों की संख्या अधिक है। ऐसे में मुझे लगता है कि इसका सामाजिक- आर्थिक सर्वे जरूरी है। यह इसलिए भी जरूरी है कि जब हम ग्रामीण क्षेत्र के विकास के लिए तमाम योजनाएं चला रहे हैं तो फिर क्या उन योजनाओं का लाभ नीचे तबके के लोगों तक नहीं पहुंच रहा। आखिर क्या वजह है कि यह बीमारी गरीबों को ही चपेट में ले रही है?