Thursday, July 19th, 2018

बात गुजरात की_प्रशासन ठप, रिमोट कंट्रोल, दिल्ली में बैठे बड़े नेताओं के हाथ

अहमदाबाद। गुजरात में नई सरकार बने चार महीने हो गए पर प्रशासनिक कामकाज ठप है। पिछले दिसंबर में चुनाव परिणाम आने के बाद भाजपा की नई सरकार बनने के बाद से किसी भी प्रकार का कोई जनोन्मुख काम नहीं हो रहा है। सचिवालय के गलियारों में भी यह चर्चा है कि सरकार में व्यापक पैमाने पर बदलाव की तैयारी शुरू हो गई है। 

गुजरात में पाटीदारों के आंदोलन के बाद से ही भाजपा सरकार बचाव की स्थिति में आ गई थी। पाटीदारों के खिलाफ पुलिस और अदालती मामले और उनके निराकरण में बहुत वक्त जाया हो गया था। उन्हीं दिनों दलित और ओबीसी समाज ने भी सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया था जिस कारण सरकार और भाजपा के लिए मुश्किलें खड़ी हो गई थीं। 2015 में उत्पन्न सिथति ठेठ 2017 के विधानसभा चुनाव तक कायम थी परंतु चुनाव में भाजपा जैसे तैसे सरकार बनाने में कामयाब हो गई पर प्रशासनिक मशीनरी एकदम शिथिल हो गई। 
 
वरिष्ठ और शीर्षस्थ अफसरों की भी सरकार की योजनाओं में खास रूचि नहीं है। सियासी गलियारों में चर्चा है कि गुजरात में शासन रिमोट कंट्रोल से दिल्ली में बैठे बड़े नेता चला रहे हैं। आईएएस और आईपीएस के तबादलों की सूची भी दिल्ली भेजी जाती है, वहां से मंजूरी मिलने के बाद ही आदेश होते हैं। आला अफसरों में भी यह धारणा बन गई है कि मुख्यमंत्री, उप मुख्यमंत्री सहित केबिनेट के मंत्रीगण भी स्वतंत्र रूप से कोई निर्णय नहीं ले सकते हैं। ऐसी स्थिति में वे भी पदों पर आसीन जरूर हैं पर बिना जोश और उत्साह के काम कर रहे हैं। इस कारण विभिन्न दफ्तरों में छोटे-छोटे कामों के लिए लोगों को धक्के खाने पर मजबूर होना पड़ रहा है। 

 

Source : desk

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