भोपाल 
मध्य प्रदेश सरकार ने करीब 2600 निजी स्कूलों की मान्यता निरस्त कर दी है. प्रदेश में 2019-20 में उन स्कूलों मान्यताएं निरस्त की गईं, जिनमें रजिस्टर्ड किरायानामा का उल्लेख नहीं है. सबसे अधिक राजगढ़ जिले में 370 स्कूलों की मान्यता निरस्त की गई हैं. हालांकि, यह मालूम हो कि राज्य शिक्षा केंद्र के आदेश में रजिस्टर्ड किरायानामा का कोई उल्लेख नहीं है, इसके बावजूद इन स्कूलों की मान्यताएं निरस्त कर दी गईं.

इस बारे में मध्य प्रदेश के प्राइवेट स्कूल एसोसिएशन की ओर से राज्य शिक्षा केंद्र के संचालक को ज्ञापन सौंपकर यह मांग की गई है कि इन स्कूलों में कई हजार विद्यार्थी वर्तमान समय में अध्ययनरत हैं. एसोसिएशन ने अपने आवेदन में इस बात का भी उल्लेख किया है कि नि:शुल्क प्रवेशित छात्रों की संख्या भी हजारों में हैं. एसोसिएशन के प्रदेश अध्यक्ष अजीत सिंह ने बताया कि आरटीई यानि शिक्षा के अधिकार के तहत इन स्कूलों में विद्यार्थी नए सत्र में प्रवेश लेने से भी वंचित हो रहे हैं. वहीं, आरटीई के तहत वर्ष 2016-17 में प्रवेशित विद्यार्थियों के शुल्क का भुगतान नहीं किया गया है.

अजीत सिंह ने यह मांग की है कि जिन स्कूलों की मान्यता निरस्त की गई हैं, उन्हें तत्काल बहाल की जाए. उन्होंने यह भी मांग की है कि इन निजी विद्यालयों में आरटीई की प्रवेश तिथि बढ़ाई जाए और वर्ष 2016-17 की फीस प्रतिपूर्ति का भुगतान किया जाए. सभी समस्याओं का निराकरण नहीं किया गया तो एसोसिएशन प्रदेश में धरना-आंदोलन प्रदर्शन करने के लिए बाध्य होगा.