नई दिल्ली 
भारत की अर्थव्यवस्था कुछ हद तक मानसून पर भी निर्भर करती है. ऐसे में देश के लोगों से लेकर सरकार तक को मानसून के आने का इंतजार रहता है. इस बार मॉनसून के 4 जून तक आने की संभावना है.

मौसम का पूर्वानुमान लगाने वाली निजी एजेंसी स्काईमेट के मुताबिक इस बार मॉनसून दो दिन की देरी से आ सकता है. एजेंसी ने मानसून के 4 जून को केरल पहुंचने का पूर्वानुमान लगाया है. आमतौर पर केरल में मानसून शुरू होने की तारीख एक जून रहती है. मानसून के साथ ही देश में बारिश के मौसम की भी शुरुआत हो जाएगी. हालांकि एजेंसी के जरिए इस बार बारिश को लेकर संभावनाएं जताई गई हैं कि मानसून में बारिश 'सामान्य से कम' रह सकती है. वहीं मानसून की गति भी सहज नहीं रहने की भी संभावना जताई गई है क्योंकि माना जा रहा है कि पूरे भारत में इसकी प्रगति सुचारू रूप से नहीं होगी. मॉनसून के सामान्य से नीचे 93 फीसदी रहने की संभावना है.

पूरे चार महीने के मानसून के मौसम के दौरान देश में औसत या सामान्य बारिश 50 साल के औसत के आधार पर 96 से 104 फीसदी के बीच बताई गई है. स्काईमेट के सीईओ जतिन सिंह ने कहा, 'अंडमान और निकोबार द्वीप समूह में मानसून 22 मई को पहुंचेगा. दक्षिण पश्चिम मानसून 2019 केरल में चार जून को दस्तक दे सकता है.' उन्होंने कहा, 'इस मौसम में सभी चार क्षेत्रों में सामान्य से कम बारिश होने जा रही है. पूर्व और पूर्वोत्तर भारत और मध्य हिस्से बारिश के मामले में उत्तर पश्चिम भारत और दक्षिणी प्रायद्वीप से खराब स्थिति में रहेंगे. मानसून की शुरुआत चार जून के आसपास होगी. ऐसा लगता है कि भारतीय प्रायद्वीप में मानसून का शुरुआती चरण धीमा होने जा रहा है.'

क्या होगा असर

स्काईमेट का कहना है कि बारिश के सामान्य से कम होने की उम्मीद 55 फीसदी है. जिसका अल नीनो पर प्रभाव पड़ेगा. इसके मुताबिक सभी उत्तर भारत राज्यों वाले उत्तर पश्चिम भारत में लॉन्ग पीरियड एवरेज (एलपीए) की 96 फीसदी बारिश होगी. जो कि सामान्य और सामान्य से कम बारिश की श्रेणी में आता है. स्काईमेट के मुताबिक पहाड़ी राज्यों जम्मू कश्मीर, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड में मैदानी राज्यों पंजाब, हरियाणा, राजस्थान और दिल्ली-एनसीआर के मुकाबले ज्यादा बारिश होने की संभावना है. वहीं मध्य भारत में एलपीए के 91 फीसदी तक बारिश होने की संभावना है. विदर्भ, मराठावाडा, पश्चिम मध्य प्रदेश और गुजरात में बारिश सामान्य से बहुत कम रहेगी. हालांकि इससे हालात और ज्यादा बिगड़ सकते हैं क्योंकि मराठावाडा और गुजरात के कई हिस्से सूखे जैसे हालात से जूझ रहे हैं.

स्काईमेट ने कहा, 'कर्नाटक के उत्तरी अंदरुनी हिस्से और रायलसीमा में खराब बारिश हो सकती है. केरल और तटीय कर्नाटक में बेहतर बारिश होने का अनुमान है.'