नई दिल्ली

उम्मीदवारों की आपराधिक पृष्ठभूमि के बारे में अखबार, टीवी और रेडियो में तीन बार प्रचार करने के आदेश देने के बाद निर्वाचन आयोग ने राजनैतिक दलों को निर्देश दिया है वे इस मद में किए गए खर्च को चुनाव खर्च के स्टेटमेंट में भी दर्शाएंगे। 

आयोग ने ताजा दिशानिर्देश में कहा है कि इसके लिए चुनाव खर्च दर्शाने का नया फार्मेट जारी कर दिया गया है। इसमें उम्मीदवारों के आपराधिक रिकार्ड की जानकारी प्रकाशित करने में किए गए खर्च के लिए एक कालम बनाया गया है। सभी मुख्य निर्वाचन अधिकारियों को भजे गए निर्देश में निर्वाचन आयोग ने कहा कि आरपी एक्ट, 1951 की धारा 78 के तहत सभी दलों को चुनाव खर्च का एब्स्ट्रेक्ट (अनुमानित हिसाब) हिसाब नतीजे आने के दिन से 30 दिनों में देना अनिवार्य है। 

राजनैतिक दलों के लिए यह भी अनिवार्य है कि वे 75 दिनों में विधानसभा चुनाव में किए गए खर्च तथा 90 दिनों में दे दें। आयोग ने कहा कि इसके लिए नए फार्मेट जारी कर दिए गए हैं और अब राजनैतिक दल इसमें आपराधिक पृष्ठभूमि के प्रचार में किए गए खर्च को भी शामिल करेंगे। 

गौरतलब है कि आपराधिक पृष्ठभूमि के प्रकाशन का आदेश सुप्रीम कोर्ट ने गत वर्ष सितंबर में एक जनहित याचिका के आधार पर दिया था। इस याचिका में मांग की गई थी कि ऐसे उम्मीदवारों को चुनाव लड़ने से रोका जाए जिनके खिलाफ गंभीर आपराधिक मामलों में कोर्ट में आरोप तय हो चुके हैं, तभी राजनीति में शुचिता आएगी। 

लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने इससे इनकार कर दिया और कहा कि महज आरोप तय होने के आधार पर किसी को चुनाव लड़ने से नहीं रोका जा सकता। उसे तभी चुनाव से रोका जा सकता है जब वह अपराध में दंडित हो चुका हो। कोर्ट ने कहा कि हम यह कर देते हैं कि जिन उम्मीदवारों का आपराधिक रिकार्ड हो उसका पूरा प्रचार किया जाए। कोर्ट ने आदेश दिया था कि राजनैतिक दलों की जिम्मेदारी होगी कि जिन उम्मीदवारों को वे चुनाव लड़ा रहे हैं उनके अपराधिक रिकार्ड का ब्योरा प्रमुख अखबारों और टीवी में प्रमुखता से तीन बार छपवाएंगे, जिससे वोटर को पता चल सके उसका उम्मीदवार क्या है।