भोपाल
बीजेपी ने मध्‍य प्रदेश की चार लोकसभा सीटों पर प्रत्‍याशियों के नाम का ऐलान कर दिया है। इनमें साध्‍वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर के अलावा तीन और नाम हैं। साध्‍वी प्रज्ञा को भोपाल से टिकट दिया गया है। साध्‍वी प्रज्ञा बुधवार को ही बीजेपी में शामिल हुई हैं।


साध्वी प्रज्ञा के अलावा गुना से डॉ. केपी यादव, सागर से राज बहादुर सिंह और विदिशा से रमाकांत भार्गव को टिकट दिया गया है। इससे पहले बीजेपी में शामिल होने के फौरन बाद प्रेस से बात करते हुए साध्‍वी प्रज्ञा ने कहा था, 'मैंने औपचारिक रूप से बीजेपी की सदस्यता ले ली है। मैं चुनाव लड़ूंगी और जीतूंगी भी। मेरे पास शिवराज सिंह चौहान का समर्थन है।'

चूंकि साध्‍वी प्रज्ञा ठाकुर अब भोपाल सीट से लड़ रही हैं इसलिए उनका मुकाबला कांग्रेस के दिग्‍गज नेता और पूर्व मुख्‍यमंत्री दिग्विजय सिंह से होगा। मध्य प्रदेश के सीएम कमलनाथ से जब मीडिया ने साध्वी प्रज्ञा की बीजेपी में एंट्री पर सवाल पूछा तो उन्होंने कहा था साध्वी का बीजेपी में शामिल होना पार्टी की मनोदशा को दिखाता है।

दिग्विजय सिंह की धुर विरोधी
साध्वी प्रज्ञा और दिग्विजय सिंह को एक दूसरे का धुर विरोधी माना जाता है। दिग्विजय सिंह कांग्रेस के उन चुनिंदा नेताओं में से एक हैं, जिन्होंने यूपीए सरकार के दौर में 'भगवा आतंकवाद' के मुद्दे को जोर-शोर से उठाया। शायद यही वजह है कि साध्वी प्रज्ञा चुनावी बिसात पर दिग्विजय सिंह को चुनौती देना चाहती हैं। साध्‍वी प्रज्ञा ठाकुर मालेगांव ब्‍लास्‍ट की आरोपी हैं।

साध्‍वी प्रज्ञा ठाकुर और दिग्विजय का मुकाबला इसलिए भी दिलचस्‍प होने वाला है क्‍योंकि दिग्विजय 16 साल बाद चुनाव लड़ने जा रहे हैं। 1993 से 2003 तक लगातार 10 सालों तक मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री रहे दिग्विजय सिंह 2003 के बाद से अबतक किसी भी लोकसभा या विधानसभा चुनाव में नहीं लड़े हैं।

2008 में चर्चा में आईं प्रज्ञा ठाकुर
साध्वी प्रज्ञा ठाकुर पहली बार तब चर्चा में आईं, जब 2008 के मालेगांव ब्लास्ट केस में उन्हें गिरफ्तार किया गया। वह 9 सालों तक जेल में रहीं और फिलहाल जमानत पर बाहर हैं। जमानत पर बाहर आने के बाद उन्होंने कहा था कि उन्हें लगातार 23 दिनों तक यातना दी गई थी।

साध्वी प्रज्ञा 2007 के आरएसएस प्रचारक सुनील जोशी हत्याकांड में भी आरोपी थीं, लेकिन कोर्ट ने उन्हें सभी आरोपों से बरी कर दिया। साध्वी प्रज्ञा का जन्म मध्य प्रदेश के भिंड जिले के कछवाहा गांव में हुआ था। हिस्ट्री में पोस्ट ग्रैजुएट प्रज्ञा का शुरुआत से ही राष्ट्रवादी संगठनों की तरफ रुझान था। वह आरएसएस की छात्र इकाई एबीवीपी की सक्रिय सदस्य भी रह चुकी हैं।