नारायणपुर
नारायणपुर कलेक्टर श्री पी.एस. एल्मा ने आज सवेरे जिले के बड़े पांच गांवों जम्हरी, बेलगांव, बाकुलवाही, कुम्हली (गढ़बेंगाल) एवं पूसागांव (पालकी) आदि का सघन दौरा किया। उन्होंने राज्य सरकार की महत्वाकांक्षी योजना छत्तीसगढ़ के चार चिन्हारी नरवा, गरूवा, घुरवा एवं बाड़ी की जमीन नाला, आदि के बारे में ग्रामीणजनों से बातचीत कर कार्यक्रम के क्रियान्वयन की जानकारी ली।  इस दौरान मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिला पंचायत श्री अमृत विकास तोपने, अतिरिक्त मुख्य कार्यपालन अधिकारी श्री हरीशंकर चौहान, सीईओ जनपद पंचायत नारायणपुर के श्री संजय चंदेल समेत अन्य संबंधित अधिकारी-कर्मचारी साथ थे।

मालूम हो कि नारायणपुर जिले में भू-जल स्तर को बढ़ाने और खेती-किसानी के लिए पानी जमा करने के लिए पांच नरवा (नाला) चिन्हांकित किए गए है। ये नाले गांव सुपगांव, पूसागांव, कुम्हली, कोड़ोली और महिमागवाड़ी नाला शामिल है। इस अभिनव योजना से किसानों की अर्थव्यवस्था में मजबूती आएगी। वहीं ग्रामीण क्षेत्रों में उपलब्ध प्राकृतिक संसाधनों जैसे नरवा (नदी-नाला) गरूवा (पशुधन) घुरूवा  (जैविक खाद बायो कम्पोस्ट ) एवं बाड़ी (घर के बाड़ी में साग-सब्जी एवं फल) से कृषि उत्पादन के साथ ही किसानों और ग्रामीणों की आमदनी में इजाफा होगा।

कलेक्टर श्री एल्मा ने बड़े जम्हरी में गौठान के लिए जमीन चयन के अवसर पर उपस्थित ग्रामीणों को कहा कि वे नरवा, गरूवा, घुरवा बाड़ी के कार्य में पूरी निष्ठा और मेहनत के साथ अपनी सहभागिता निभाए। प्रशासन भी आप लोगों की भलाई में सक्रियता के साथ है। उन्होंने चिन्हांकित नालों का भी अवलोकन किया। उन्होंने कहा कि किसी कारणवश आपके इलाके के जलस्त्रौत अवरूद्ध हो गये तथा पानी के प्राकृतिक रास्ते बंद होने से इस इलाके के तालाब, डबरी आदि भर नहीं पाते। जिसके कारण भू-जल स्तर नीचे चला जाता है।

उन्होंने ग्रामीणों से कहा कि किसी भी अच्छी खेती-फसल के लिए पानी आवश्यक है। राज्य सरकार ने खेती-किसानी और किसानों के लिए नरवा, गरूवा, घुरवा एवं बाडी पर बल दिया है। इससे  ग्रामीणों की अर्थ व्यवस्था में काफी सुधार आएगा। इस कार्य को कृषि विकास एवं किसान कल्याण विभाग के साथ-साथ वन विभाग, पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग, जल संसाधन एवं लोक स्वास्थ्य आदि विभागों के समन्वय से किया जा रहा है। उपस्थित ग्रामीणों ने कलेक्टर को गांव की और अपनी समस्याओं से अवगत कराया।