भारत के मोबाइल मार्केट में टॉप 5 स्मार्टफोन ब्रैंड्स की बाजार हिस्सेदारी 75 फीसदी से ज्यादा है। बाकी की बची बाजार हिस्सेदारी में 88 से ज्यादा स्मार्टफोन ब्रैंड्स के बीच कड़ी टक्कर है, ऐसे में इन कंपनियों में से हरेक के हाथ सिर्फ 0.3 फीसदी मार्केट शेयर ही है। इन 88 कंपनियों में पैनासोनिक और विडियोकॉन जैसे ब्रैंड्स भी शामिल हैं। ये कंपनियां करीब 43,560 करोड़ रुपये के रेवेन्यू में से ज्यादा से ज्यादा हिस्सेदारी पाने की कोशिश करती हैं। प्रत्येक ब्रैंड के हाथ औसतन करीब 475 करोड़ रुपये आते हैं।

37,000 करोड़ रुपये से ज्यादा रही सैमसंग की सेल
वहीं, दूसरी तरफ भारत में सैमसंग के मोबाइल फोन बिजनेस की सेल्स वित्त वर्ष 2018 में 37,000 करोड़ रुपये से ज्यादा रही है। चीन की कंपनी शाओमी की सेल्स करीब 23,000 करोड़ रुपये रही है। जबकि ओप्पो का रेवेन्यू करीब 12,000 करोड़ रुपये रहा है। वित्त वर्ष 2018 में वीवो का रेवेन्यू 11,000 करोड़ रुपये को पार कर गया है। ऐसे में सवाल खड़ा होता है कि इस बेहद प्रतिस्पर्धी मार्केट में 88 में से कितनी कंपनियां अपना वजूद बनाए रखने में कामयाब होंगी? मार्केट रिसर्च फर्म साइबरमीडिया रिसर्च (CMR) में इंडस्ट्री इंटेलीजेंस ग्रुप के हेड प्रभु राम का कहना है, 'टॉप 5 स्मार्टफोन ब्रैंड्स के बीच कंसॉलिडेशन बढ़ने से दूसरी कंपनियों के लिए संभावनाएं काफी कम हो गई हैं।'

14.5 फीसदी रही स्मार्टफोन मार्केट की ग्रोथ
पिछले दो सालों में फीचर फोन से स्मार्टफोन्स अपग्रेड बाजार की उम्मीद के मुताबिक नहीं रहा है। राम ने बताया, 'रीफर्बिश्ड/सेकंड-हैंड फोन मार्केट में तेजी से उछाल आने के कारण ऐसा हुआ है।' इंटरनेशनल डेटा कॉरपोरेशन (IDC) के मुताबिक, 2018 में भारत के स्मार्टफोन मार्केट की ग्रोथ 14.5 फीसदी रही है। अब तक सबसे ज्यादा 14.23 करोड़ यूनिट्स स्मार्टफोन का शिपमेंट हुआ है। वित्त वर्ष 2018 में 4.11 करोड़ यूनिट्स के शिपमेंट के साथ शाओमी की बाजार हिस्सेदारी 28.9 फीसदी रही है। वहीं, सैमसंग की बाजार हिस्सेदारी 22.4 फीसदी रही। वीवो (Vivo) की बाजार हिस्सेदारी 10 फीसदी रही है, कंपनी ने 1.42 करोड़ मोबाइल का शिपमेंट किया। वहीं, ओप्पो (Oppo) का मार्केट शेयर 7.2 फीसदी रही है।